Zaroori Tha (Lofi Flip)
🎵 2870 characters
⏱️ 3:22 duration
🆔 ID: 24018033
📜 Lyrics
लफ्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
तूने जब आख़िरी खत मेरा जलाया होगा
तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
ना आ आ आ आ
ना आ आ आ आ
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
बताओ याद है तुमको
वो जब दिल को चुराया था
चुराई चीज़ को तुमने
ख़ुदा का घर बनाया था
वो जब कहते थे मेरा
नाम तुम तस्बीह में पढ़ते हो
मोहब्बत की नमाज़ों
को कज़ा करने से डरते हो
मगर अब याद आता है
वो बातें थी महज़ बातें
कहीं बातों ही बातों में
मुकरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
ना आ आ आ आ
ना आ आ आ आ
वही हैं सूरतें अपनी
वही मैं हूँ, वही तुम हो
मगर खोया हुआ हूँ मैं
मगर तुम भी कहीं गुम हो
मोहब्बत में दग़ा की
थी सो काफ़िर थे सो काफ़िर हैं
मिली हैं मंज़िलें फिर
भी मुसाफिर थे मुसाफिर हैं
तेरे दिल के निकाले हम
कहाँ भटके कहाँ पहुंचे
मगर भटके तो याद आया
भटकना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
तूने जब आख़िरी खत मेरा जलाया होगा
तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
ना आ आ आ आ
ना आ आ आ आ
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
बताओ याद है तुमको
वो जब दिल को चुराया था
चुराई चीज़ को तुमने
ख़ुदा का घर बनाया था
वो जब कहते थे मेरा
नाम तुम तस्बीह में पढ़ते हो
मोहब्बत की नमाज़ों
को कज़ा करने से डरते हो
मगर अब याद आता है
वो बातें थी महज़ बातें
कहीं बातों ही बातों में
मुकरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
ना आ आ आ आ
ना आ आ आ आ
वही हैं सूरतें अपनी
वही मैं हूँ, वही तुम हो
मगर खोया हुआ हूँ मैं
मगर तुम भी कहीं गुम हो
मोहब्बत में दग़ा की
थी सो काफ़िर थे सो काफ़िर हैं
मिली हैं मंज़िलें फिर
भी मुसाफिर थे मुसाफिर हैं
तेरे दिल के निकाले हम
कहाँ भटके कहाँ पहुंचे
मगर भटके तो याद आया
भटकना भी ज़रूरी था
मोहब्बत भी ज़रूरी थी
बिछड़ना भी ज़रूरी था
ज़रूरी था की हम दोनों
तवाफ़े आरज़ू करते
मगर फिर आरज़ूओं का
बिखरना भी ज़रूरी था
तेरी आँखों के दरिया का
उतरना भी ज़रूरी था
⏱️ Synced Lyrics
[00:01.42] लफ्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे
[00:17.84] तूने जब आख़िरी खत मेरा जलाया होगा
[00:30.08] तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
[00:44.36] देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
[01:00.47] ना आ आ आ आ
[01:08.08] ना आ आ आ आ
[01:15.94] तेरी आँखों के दरिया का
[01:19.94] उतरना भी ज़रूरी था
[01:24.49] मोहब्बत भी ज़रूरी थी
[01:28.59] बिछड़ना भी ज़रूरी था
[01:32.81] ज़रूरी था की हम दोनों
[01:37.08] तवाफ़े आरज़ू करते
[01:41.32] मगर फिर आरज़ूओं का
[01:45.47] बिखरना भी ज़रूरी था
[01:49.80] तेरी आँखों के दरिया का
[01:53.98] उतरना भी ज़रूरी था
[02:23.45] बताओ याद है तुमको
[02:27.30] वो जब दिल को चुराया था
[02:31.67] चुराई चीज़ को तुमने
[02:35.61] ख़ुदा का घर बनाया था
[02:40.20] वो जब कहते थे मेरा
[02:43.70] नाम तुम तस्बीह में पढ़ते हो
[02:48.51] मोहब्बत की नमाज़ों
[02:51.97] को कज़ा करने से डरते हो
[02:56.88] मगर अब याद आता है
[03:01.18] वो बातें थी महज़ बातें
[03:05.41] कहीं बातों ही बातों में
[03:09.41] मुकरना भी ज़रूरी था
[03:13.72] तेरी आँखों के दरिया का
[03:17.95] उतरना भी ज़रूरी था
[03:23.23] ना आ आ आ आ
[03:31.40] ना आ आ आ आ
[04:13.30] वही हैं सूरतें अपनी
[04:17.06] वही मैं हूँ, वही तुम हो
[04:21.21] मगर खोया हुआ हूँ मैं
[04:25.46] मगर तुम भी कहीं गुम हो
[04:29.74] मोहब्बत में दग़ा की
[04:33.05] थी सो काफ़िर थे सो काफ़िर हैं
[04:37.95] मिली हैं मंज़िलें फिर
[04:41.45] भी मुसाफिर थे मुसाफिर हैं
[04:46.45] तेरे दिल के निकाले हम
[04:50.48] कहाँ भटके कहाँ पहुंचे
[04:54.86] मगर भटके तो याद आया
[04:58.97] भटकना भी ज़रूरी था
[05:03.24] मोहब्बत भी ज़रूरी थी
[05:07.45] बिछड़ना भी ज़रूरी था
[05:11.88] ज़रूरी था की हम दोनों
[05:15.82] तवाफ़े आरज़ू करते
[05:19.99] मगर फिर आरज़ूओं का
[05:24.12] बिखरना भी ज़रूरी था
[05:28.57] तेरी आँखों के दरिया का
[05:32.94] उतरना भी ज़रूरी था
[00:17.84] तूने जब आख़िरी खत मेरा जलाया होगा
[00:30.08] तूने जब फूल किताबों से निकाले होंगे
[00:44.36] देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
[01:00.47] ना आ आ आ आ
[01:08.08] ना आ आ आ आ
[01:15.94] तेरी आँखों के दरिया का
[01:19.94] उतरना भी ज़रूरी था
[01:24.49] मोहब्बत भी ज़रूरी थी
[01:28.59] बिछड़ना भी ज़रूरी था
[01:32.81] ज़रूरी था की हम दोनों
[01:37.08] तवाफ़े आरज़ू करते
[01:41.32] मगर फिर आरज़ूओं का
[01:45.47] बिखरना भी ज़रूरी था
[01:49.80] तेरी आँखों के दरिया का
[01:53.98] उतरना भी ज़रूरी था
[02:23.45] बताओ याद है तुमको
[02:27.30] वो जब दिल को चुराया था
[02:31.67] चुराई चीज़ को तुमने
[02:35.61] ख़ुदा का घर बनाया था
[02:40.20] वो जब कहते थे मेरा
[02:43.70] नाम तुम तस्बीह में पढ़ते हो
[02:48.51] मोहब्बत की नमाज़ों
[02:51.97] को कज़ा करने से डरते हो
[02:56.88] मगर अब याद आता है
[03:01.18] वो बातें थी महज़ बातें
[03:05.41] कहीं बातों ही बातों में
[03:09.41] मुकरना भी ज़रूरी था
[03:13.72] तेरी आँखों के दरिया का
[03:17.95] उतरना भी ज़रूरी था
[03:23.23] ना आ आ आ आ
[03:31.40] ना आ आ आ आ
[04:13.30] वही हैं सूरतें अपनी
[04:17.06] वही मैं हूँ, वही तुम हो
[04:21.21] मगर खोया हुआ हूँ मैं
[04:25.46] मगर तुम भी कहीं गुम हो
[04:29.74] मोहब्बत में दग़ा की
[04:33.05] थी सो काफ़िर थे सो काफ़िर हैं
[04:37.95] मिली हैं मंज़िलें फिर
[04:41.45] भी मुसाफिर थे मुसाफिर हैं
[04:46.45] तेरे दिल के निकाले हम
[04:50.48] कहाँ भटके कहाँ पहुंचे
[04:54.86] मगर भटके तो याद आया
[04:58.97] भटकना भी ज़रूरी था
[05:03.24] मोहब्बत भी ज़रूरी थी
[05:07.45] बिछड़ना भी ज़रूरी था
[05:11.88] ज़रूरी था की हम दोनों
[05:15.82] तवाफ़े आरज़ू करते
[05:19.99] मगर फिर आरज़ूओं का
[05:24.12] बिखरना भी ज़रूरी था
[05:28.57] तेरी आँखों के दरिया का
[05:32.94] उतरना भी ज़रूरी था